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लाॅकडाउन



इधर कई महीने काफी ठण्ड होने के कारण अधिक दिनों से मैं अपने गांव नहीं जा सका। मार्च का महीना होने के कारण मौसम में कुछ गर्मी आ गयी इस कारण कई दिनों से अपने पैतृक गांव हसनपुर, औरास, उन्नाव जाने की सोच रहा था। गांव की याद आते ही मन उल्लास से भर जाता है क्योंकि गंाव में बचपन की काफी यादें आज भी हृदय में बसी हुई हैं और यही अतीत की यादें आज हमें गांव जाने पर विवश कर देती हैं। शहर की भागमभाग भरी जिन्दगी के कारण अपनों से मिलने का समय ही कहाॅ मिल पाता है।
आज कई दिनो से गांव जाने का मन कर रहा था, परन्तु देश में एक कोरोना वायरस बीमारी ने दस्तक दे दी और इस बीमारी ने बड़ी ही तेजी से देश के कई प्रदेशों में अपने पांव जमाने शुरू भी कर दिये इसीे कारण 24 मार्च, 2020 की मध्य रात्रि से प्रधानमंत्री द्वारा पूरे देश में 14.04.2020 तक लाॅकडाउन की घोषणा कर दी गयी, जिस कारण मैं भी अपने गांव नहीं जा सका जिसका मुझे बहुत ही अफसोस है। इधर कई दिनों से फिर गांव जाने की मन में लालसा हो रही थी कि शायद प्रधानमंत्री जी द्वारा दिनांक 14.04.2020 से लाॅकडाउन खोल दिया जाय जिससे मैं अपने गांव जा सकूॅू। परन्तु ऐसा नहीं हुआ और प्रधानमंत्री जी द्वारा लाॅकडाउन-2 की घोषणा पुनः 03मई,2020 तक के लिए कर दी गयी, जिससे मेेरे गांव जाने की इच्छा फिर से धूलधूसरित हो गयी।
आज कोरोना वायरस से बचने के लिए दुनिया भर में ‘‘सोशल डिस्टेंसिंग‘‘ (सामाजिक दूरी) का जोर-शोर से प्रचार चल रहा है और टेलीविजन के माध्यम व कई सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा इस ‘‘सोशल डिस्टेंसिंग‘‘ (सामाजिक दूरी) के सम्बन्ध में विस्तृत से जानकारी दी जा रही है ताकि कोरोना जैसी गम्भीर बीमारी एक दूसरे में न फैले। दुनिया के कई देशों में जब कोरोना का खतरा बढ़ना शुरू हुआ तब विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस वायरस से बचने के लिए प्रारम्भ में ‘‘सोशल डिस्टेंसिंग‘‘ (सामाजिक दूरी) शब्द का प्रयोग किया और इस शब्द का प्रधानमंत्री जी द्वारा भी अपने सम्बोधन में बार-बार दोहराया जा रहा है ताकि इस शब्द का अर्थ हर नागरिक तक पहंुचे और इसका पूर्ण रूप से पालन किया जाय जिससे कोरोना जैसी घातक बीमारी से बचा जा सके।
इस लाॅकडाउन होने के कारण मेरा आफिस भी जाना नहीं हो रहा है जिस कारण पूरे दिन या तो अखबार पढ़े या फिर टी0वी0 पर न्यूज चैनल बदल-बदल कर न्यूज देखें इसके अलावा समय बिताने का दूसरा कोई जरिया नहीं है। समाचार पत्रों व न्यूज चैनलों के माध्यम से देश में एक दूसरे राज्यों से पलायन कर रोजी-रोटी की तलाश में गये हुए हमारे आर्थिक रूप से कमजोर, गरीब मजदूर काफी मात्रा में अपने घरों से हजारो कि0मी0 की दूर पर अपना घर-परिवार, बूढ़े माॅ-बाप व पत्नी, बच्चों को छोड़कर गांवों से बड़े-बड़े शहरों में रोजी-रोटी की तलाश में गये हुए हैं, जिन्हें अचानक हुए इस लाॅकडाउन की घोषणा से वे सब जहाॅ थे वहीं पर फंस गये, क्यांेकि उन्हें इस बारे में सोचने का मौका ही नहीं मिला कि वे कुछ निर्णय कर पाते। सरकार ने सभी प्रकार के याता-यात साधनों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी  जिससे लाखों मजदूर अपने घर वापस जाने से वंचित रह गये।
लाॅकडाउन-1 जो 21 दिन का था इसी आशा में किसी तरह बड़ी दुश्वारियांे के साथ काटा कि शायद 14 अप्रैल, 2020 के बाद लाॅकडाउन खत्म जाये और लाॅकडाउन खत्म होते ही हम लोग अपने परिवार के साथ गांव वापस चले जायेगें जहाॅ पर उनका सारा जहान बसता है, परन्तु 14 अप्रैल को ही प्रधानमंत्री जी द्वारा 03 मई से 19 दिन का लाॅकडाउन फिर से बढ़ा दिया गया, जिससे हजारों कि0मी0 दूर बसे गरीब मजबूर मजदूर लाखों की संख्या में देश के विभिन्न प्रदेशों में छोेटे-छोटे किराये के कमरों व झुग्गी झोपड़ियों में परिवार के साथ 10-12 की संख्या में रहने को मजबूर है, जो खाने-पीने के लिए मोहताज हो रहे हें इस कारण उन्हें बहुत ही भारी मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे कोरोना के अलावा और कई तरह की बीमारियों ने वहाॅ पर अपन पांव पसार लिये इससे आगे के दिनों इन महानगरों की स्थिति और और भी भयावह हो सकती है जिसका सहज ही अनुमान लगाना कठिन है।
मुम्बई, सूरत व दिल्ली जैसे बड़े महानगरो में फंसे लाखों की संख्या में रोज कमाने व रोज खाने वाले ऐसे परिवार एक ही खोली/कमरे में दस-दस बारह लोग एक साथ ही रह रहे हैं उन्हें न तो पर्याप्त मात्रा में खाना मिल रहा है और न ही पीने के लिए शुद्ध पानी। सबसे बड़ी समस्या इन लोगों को जो है, वह है शौचालय की। बड़े महानगरों में अधिकांश यह तबका नगर निगम द्वारा निर्मित स्वच्छ शौचालयों का ही प्रयोग करता है। हर रोज टी0वी0 न्यूज चैनलों पर देखते हैं कि एक शौचालय के आगे सैकड़ों महिलाएं, बच्चे भारी संख्या में लोग अपनी बारी के आने का इन्तजार करते हुए नजर आते हैं, इससे सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है कि इन गरीब तबके के लोगों का जीवन किन मुसीबत भरी परिस्थितयों से गुजर रहा होगा। इस कोरोना वायरस की बीमारी से दिल्ली व अन्य बड़े शहरों से हजारों की संख्या में अपने गांव की ओर पैदल पलायन करने वाले लाखों मजदूरों के सामने एक तरफ कोरोना से मरने का खौफ है तो दूसरी तरफ भूख से लड़ने का संकट भी है। इनमें गांव से ताल्लुक रखने वाले अधिकतर कम पढ़े-लिखे मजदूर हैें, जो असंगठित भी हैं। इसलिए सरकार से मिलने वाली सहायता भी इन्हें नहीं प्राप्त हो सकती।
इस महामारी बीमारी से यह तो साफ हो गया है कि प्रशासन व पूंजीवाद ये दोनों मजदूरों के दुश्मन हैं, क्योंकि दोनो समता, स्वतंत्रता और बंधुता के खिलाफ हैं। इनके इस कथन का प्रमाण वर्तमान में हजारों की संख्या में बड़े महानगरों से अपने घरों के लिए मजूदर पैदल पलायन कर रहे थे। लाॅकडान में हमें एक बहुत ही मार्मिक और दिल को झकझोर देेने  और मानव समाज को एक बार सोचने पर मजबूर करने वाली घटना उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में देखने को मिली, जहाॅ मजदूरों को बैठकार उनके ऊपर आम के बागानोें की तरह केमिकल का छिड़काव किया गया, जिसमें कई लोग बुरी तरह से प्रभावित हुए यहाॅ तक समाचार पत्रों के माध्यम से यह खबर आ रही थी कि कई मजदूरों की आॅखों में इस केमिकल का इतना असर हो गया है कि उनकी आॅखें तक भी जा सकती है। ऐसी घटनाएं समाज व देश के लिए शर्मसार करने वाली हैं। आखिर यह लोग तो भी अपने ही देश व समाज के नागरिक हैं इनके साथ जानवरों जैसा दुर्वव्यहार क्यों? यह बहुत ही विचारणीय विषय है।
इस कोरोना नाम के वायरस ने हमें जिन्दगी जीने के लिए कई प्रकार के ज्ञान का  बोध भी करा दिया है। कोरोना वायरस से मनुष्यों में सैकड़ों बीमारियाॅ फैली थी जिसके इलाज के लिए सरकारी अस्पताल व नर्सिंग होम व प्राइवेट डाक्टरों के यहाॅ हजारों रूपये देकर नम्बर लेकर अपना इलाज कराते हुए नजर आते थे परन्तु आज इस कोरोना वायरस से यह सब बीमारियाॅ कहाॅ विलुप्त हो गयी। क्या इस वायरस के डर से बाकी सारी बीमारियाॅ खत्म हो गयी या फिर किसी ऐसे तत्वों द्वारा यह बीमारियाॅ पैदा की जा रही थी जिससे अनावश्यक रूप से जनता से पैसा वसूला जा रहा था।
इस वैश्विक बीमारी ने दुनिया को हिला कर रख दिया हैे और यह भी जता दिया है कि बड़ी-बड़ी मल्टीेनेशनल कम्पनियांे द्वारा मनुष्य का पेट नहीं भरा जा सकता। इन कम्पनियों के आगे हमारे अन्नदाता किसान को पूंजीपति और उद्योगपति बड़ी ही तुच्छ नजर से देखते हैं परन्तु आज कोरोना वायरस ने ऐसे लोगों को उनकी औकात बता दी कि आपकी बड़ी-बड़ी कम्पनियों मेें आज ताला लगा हुआ है और पूरे देश का वहीं सबसे तुच्छ समझा जाने वाला किसान समाज ही पूरे देश का पेट भरने का कार्य कर रहा है क्यांेंकि इस बीमारी के डर से जंग फूड वाली कम्पनियाॅ जैसे जोमैटो, डोमिनश, पिज्जा हट और न जाने कितनी कम्पनियाॅ देशी और विदेशी अपने बड़े-बड़े विज्ञापनों के साथ कहाॅ गायब हो गयी, इनका कोई अता-पता नहीं है। बचा है तो सिर्फ किसान, जो चावल, आटा-दाल और सब्जियों से आज भी निर्बाध रूप से सभी देशवासियांे का पेट भरने का काम रहा है। ए0सी0 में बैठने वाली सारी कम्पनियाॅ एक ही झटके में ही भाग खड़ी हुई और हमारा किसान आज 35-40 डिग्री की गर्मी व धूप में सभी का पेट भरने के लिए दिन- रात खेतों में कड़ी मेहनत से काम रहा है। इससे सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि आज के दिन में असली होरो कौन है। इस पर आगे आने समय में देश और दुनिया को विचार करना होगा कि खेती-किसानी और किसानों की समस्याओं पर प्राथमिकता पर विचार करना होगा, क्यांेंकि हाइवे, मैट्रो यदि एक बार न भी बने तो काम चल जायेगा परन्तु यदि किसान खेती करना छोड़ देगा, तो समझों मानव जाति का इस दुनिया में अस्तित्व ही खतरे मंे पड़ जायेगा।
फिलहाल जो इस वैश्विक बीमारी कोरोना से आमजन को नुकसान तो हो रहा है परन्तु  फायदा भी काफी हो रहा है। इस लाॅकडाउन से पहले दुनिया में इतना ज्यादा प्रदूषण फैला हुआ था कि पृथ्वी पर पेड़-पौधे व जगली पशु-पक्षियों को सांस लेना भी काफी मुश्किल हो रहा था और प्रदूषण की वजह से काफी संख्या में पशु-पक्षियों की प्रजाति ही विलुप्त हो रही थी। आज इस लाॅकडाउन ने लाखों पशु-पक्षियों व पेड़-पौधों को एक नया जीवन प्रदान किया है। जहाॅ हर देश की जो सरकारंे जिन नदियों से प्रदूषण हटाने के लिए अरबों रूपया कई वर्षो से खर्चा करने के बावजूद जल शुद्ध नही कर पायी वह काम इस कोरोना वायरस ने  21 दिन में ही कर दिया जिससे आगे के दिनों में मानव जाति के साथ-साथ धरती पर हजारो जीव-जन्तुओं को एक नया जीवन जीने की नई उम्मीद दिखायी दे रही है। इस वायरस के आने से यह तो साफ हो गया कि मनुष्य चाहे जितना विकास कर ले और चाहे जितनी धन-दौलत इक्ट्ठा कर ले परन्तु प्रकृति के आगे सब निष्क्रिय है। इसलिए प्रत्येक मनुष्य का कर्तव्य है कि जहाॅ तक हो सके अपने परिवार व समाज के साथ रहे और अपने समाज व देश के जन कल्याण के लिए जितना हो सके करता रहे और लालच, लोभ त्याग कर अपने जीवन को प्रतिदिन एक नई दिशा की ओर ले जाये।